Yogi and BJP controversy news: बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया और कुछ छोटे-बड़े मीडिया प्लेटफार्म पर मुख्यमंत्री योगी (Yogi Adityanath) और बीजेपी के बिच तनातनी की खबरें वायरल हो रही है. ने जोर तब पकड़ा जब मार्च में लखनऊ में आरएसएस की बैठक हुयी, जो की अगले साल 2022 में होने वाले चुनाव पे चर्चा करने के लिए बुलाई गयी थी.
विवाद की असली जड़ उत्तर प्रदेश बीजेपी के ऑफिसियल ट्विटर अकाउंट का एक पोस्टर है जिसमे की देश के प्रधानमंत्री मोदी की फोटो नही है. दरअसल विवाद की मुख्य जड़ यह है की जिस तरह से covid-19 से निपटने में उत्तर प्रदेश मॉडल की सराहना देश ही नहीं, बल्कि विदेश यहाँ तक की खुद WHO ने की. Yogi Adityanath मॉडल को सबने सराहा उसके बाद से योगी को Best CM of India तक बोला जाने लगा. और उनकी लोकप्रियता में जो उछाल आया ये कुछ प्रमुख वजहें रही. और विरोधियो को यह कहने का मौका मिल गया.
योगी आदित्यनाथ को शुरू से ही एक प्रमुख चेहरा माना जाता रहा है. लेकिन 2019 के चुनावों के बाद जिस तरह से योगी पार्टी के स्टार प्रचारक बन के उभरे और राज्यों के उपचुनावों मे जिस तरह से उन्होंने विकास का मुद्दा उठाया, और हर राज्य के चुनावों में उनको स्टार प्रचारक बनाया गया. इससे जनता के बिच ये सन्देश गया की शायद अब योगी का कद बीजेपी के कई बड़े नेताओ से भी बड़ा हो गया है. और अगला चुनाव बीजेपी yogi adityanath के नाम पे लड़ेगी. इन सबके बीच ऐसी खबरें भी आयी की प्रधानमंत्री मोदी और योगी के बिच सब कुछ ठीक नही चल रहा है.
दरअसल जब गुजरात कैडर के पूर्व आईएस अधिकारी अरविंद कुमार शर्मा को राज्य विधान परिषद् (एमएलसी) के रूप में नामित किया गया, तबसे यह कहा जाने लगा की मोदी, योगी के ऊपर नजर रखने के लिए इस अधिकारी को अहमदाबाद से लखनऊ लाया गया है. इन बातों को और बल तब मिला जब योगी ने अरविन्द कुमार शर्मा को उपमुख्यमंत्री के रूप में समायोजित करने से मना कर दिया. कहा जाता है की जब ये प्रस्ताव आया तो मुख्यमंत्री उनसे सावधान हो गये और विश्वास करने लगे की की उनपे नजर रखने के लिए ही उनको लखनऊ बुलाया गया है.
कुछ दिन पहले आरएसएस के राष्ट्रीय उपप्रमुख दत्तात्रेय होसबले जब लखनऊ अचानक आये और योगी आदित्यनाथ से मिलने के अलावा मंत्रीपरिषद के कई सदस्यों से मिलने के बाद विधायको से भी मिल के उनकी प्रतिक्रिया लेने की लम्बी प्रक्रिया के बाद दिल्ली लौटे. और वहा ३ जून को आरएसएस की बैठक हुयी, इससे इस खबर को और हवा मिली. हालंकि बीजेपी का कोई भी आदमी इसके बारे में कुछ भी नही बोल रहा है. और सब यही कह रहे हैं कि ये सब एक अफवाह है. मोदी और योगी दोनों एक है. और जिस पोस्टर को लेके लोग अफवाह उडा रहे है, वो बहुत पुराना पोस्टर है उसको अभी तक बस बदला नही जा सका है.
ऐसे सवाल कई बार योगी आदित्यनाथ से पूछा जा चुका है लेकिन उन्होंने हर बार इसका जबाब देते हुए कहा है की प्रधानमंत्री मोदी जी एक बहुत ही अच्छे नेता हैं. और उनके हमारे बीच मतभेदों की कोई जगह नही है. मुझे किसी कुर्सी का कोई लालच नही है, मै सिर्फ अपना काम करता हूँ. और जो जिमेदारी मुझे सौपी जाती है उसका पूरी इमानदारी से पालन करता हूँ. ये सब विपक्ष की एक चाल है बीजेपी को बदनाम करने की और वोट बैंक कि राजनीती करने की. लेकिन वो इसमें कभी कामयाब नही होंगे क्योंकि जनता सब जानती है. चुनाव नजदीक है तो विपक्ष के पास अफवाह फ़ैलाने के अलावा कुछ भी नहीं है.
Yogi and BJP controversy news
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