लंगड़ा आम : गर्मियों का मौसम वैसे तो परेशानी भरा होता है, एक तरफ जहाँ सूरज भगवान अपनी किरणों से सबको बेहाल करते हैं, दूसरी तरफ पसीने और गर्म हवाओं से सबका हाल बेहाल रहता हैं। फिर भी गर्मियो में खाने को एक ऐसा फल मिलता है जिसे हम फलों का राजा कहते हैं| जी हाँ हम आज बात कर रहे हैं फलों के राजा आम के बारे में। और उनमे भी सबसे ज्यादा मीठा और मशहूर आम लंगड़ा आम जिसे की बनारसी लंगड़ा आम भी कहा जाता है।
कई बार लोग ये सोचते हैं की आखिर एक फल का नाम लंगड़ा कैसे हो सकता है इसकी वजह क्या होगी तो आईये जानते है इससे जुडी कुछ बातें-
वैसे तो भारत में कुल 1500 से भी ज्यादा आम की किस्में उगाई जाती है लेकिन एक आम जो की सबकी पसंद होता है और सबकी जुबाँ पर रहता है वो है लंगड़ा आम। क्या बच्चा , क्या बुढ्डा , क्या जवान सभी इसके दीवाने होते हैं। लंगड़ा आम की किस्म करीब 300 से 350 साल पुरानी बताई जाती है, इसके नाम के पीछे भी एक रोचक कहानी प्रचलित है।
कहते हैं लगभग 350 साल पहले बनारस के शिव मंदिर में एक लंगड़ा पुजारी था, एक दिन मंदिर में एक साधु आकर ठहरा। उसने मंदिर में आम के 2 पौधे लगाए, बहुत सालों बाद जब उन पेड़ो पर आम आने लगे तो लंगड़े पुजारी ने उन आमो को भगवान शिव को अर्पित कर दिया। वास्तव में साधु ने पुजारी को आदेश दिया था कि ये आम किसी को न दिए जाएं। परन्तु काशी के राजा ने साधु से वो आम ले लिए, कुछ ही समय में आम की यह प्रजाति पूरे बनारस में फैल गई और इस आम की प्रजाति का नाम लंगड़े पुजारी के नाम पर “लंगड़ा ” रखा गया |
आजकल इसके इतिहास को लेकर आम उगाने वाले हाजी कलीमुल्लाह की कहानी सुनाई जाती है, की उनके मामू के द्वारा पहली बार इसे उगाया गया था, जो की पूरी तरह से मनगढंत और झूठी बातें हैं।
मई से अगस्त के बीच आने वाला यह आम हरा होता है और इसका आकार मध्यम से बड़े तक होता है। हल्का पीले रंग का होता है और पकने के बाद बहुत अच्छी सुगंध होती है। अन्य क़िस्मों की तुलना में यह ज़्यादा मीठा और मुलायम होता है। इसका बीज समतल और गोल आकार का होता है। यह पकने के बाद भी हल्का कलर ही रखता है जब कि अन्य क़िस्मों में पकने के बाद रंग पीला हो जाता है।
आम के बहुत सारे फ़ायदे हैं आइये आम के फ़ायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं-
आम के फल के गूदे में कैरोटिनॉइड, एस्कॉर्बिक एसिड, टरपेनोइड्स और पॉलीफेनॉल्स होते हैं। 2010 में आयोजित एक वैज्ञानिक अध्ययन ने आम के एंटी-कैंसरिक प्रभाव का भी समर्थन किया है। जिसे मंगिफेरिन (मंगिफेरिन) नामित किया गया है, जो फल में पाया जाने वाला एक यौगिक है। मैंजीफेरिन पेट और यकृत में कैंसर कोशिकाओं और अन्य ट्यूमर कोशिकाओं को रोकता है। 2015 में आयोजित एक और अध्ययन में पाया गया कि आम में पाया जाने वाला पॉलीफेनॉल्स स्तन कैंसर को रोकता है।
लोग दिल को स्वस्थ रखने के लिए भोजन की विशेष देखभाल करते हैं। यदि आप अपने आहार में मौसमी फल आम भी शामिल करते हैं, तो दिल स्वस्थ हो सकता है। आम कार्डियक रोग के जोखिम को भी कम कर सकती है। वर्तमान में पोषक तत्व दिल को स्वस्थ रखने में सक्षम हैं। इसलिए, आम के मौसम में इसका उपभोग करना न भूलें।
विटामिन सी रोग प्रतिरोध में सुधार करने में मदद करता है। भारत के राजस्थान में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक, विटामिन सी एलर्जी की समस्या को कम कर देता है और संक्रमण के खिलाफ लड़ने में मदद कर सकता है। इसलिए, यह न केवल स्वाद के लिए, बल्कि अपने सही स्वास्थ्य के लिए भी उपभोग करता है। और आम विटामिन सी से भरा है।
एक आम में न्यूट्रासिटिकल मौजूद होता है, जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है। एक वैज्ञानिक अध्ययन में, मंगिफारिन (आम में मौजूद महत्वपूर्ण यौगिकों में से एक) का उपयोग चूहों पर किया गया था। और पाया गया की इससे कोलेस्ट्रॉल कम हो रहा है।
लैक्सेटिव (laxative) पेट को साफ करने में सहायक होता है। इससे कब्ज की समस्या ना के बराबर होती है। आम में लैक्सेटिव काफ़ी मात्रा में पाया जाता है। साथ ही साथ फाइबर भी आम में ज्यादा मात्रा में पाया जाता है, इस कारण से भी पाचन शक्ति में सुधार होता है।
आम में बहुत सारे गुण पाए जाते हैं जिससे की यह बहुत से रोगों में फ़ायदेमंद होता है। जैसे हृदय रोगों में, संभोग और शुक्राणु के लिए, आंखों के लिए, दिमाग के लिए, ब्लड प्रेशर के लिए, गर्मी से बचाव के लिए, डायबिटीज में, गर्भावस्था में, वजन कम करने में, अस्थमा या दमा में, किडनी स्टोन में, हड्डियों के मजबूती के लिए, खून की कमी (एनीमिया) में, डायरिया के लिए, हैंगओवर या नशा उतारने में, अल्सर में, थायराइड के लिए, लिवर के लिए, मलेरिया से बचाव के लिए, त्वचा के लिए, स्वस्थ बालों के लिए बहुत फायदेमंद है। इसीलिए इसे फलों का राजा कहा जाता है।
वैसे तो इसकी शुरुआत वाराणसी में हुयी थी लेकिन अब यह पुरे उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, पंजाब, पश्चिम बंगाल और राजस्थान में उगाया जाता है। यह आम कई प्रकार की मिट्टी और वातावरण में पैदा होता है।
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