Pegasus Spyware जासूसी कांड 2021, राजनीति से लेकर मीडिया तक क्यों मचा है बवाल ? जानिए सबकुछ

इन दिनों भारत की राजनीती में Pegasus Spyware (पेगासस स्पाईवेयर) के जासूसी को लेकर काफी घमासान मचा हुआ हैं . अमेरिका के दो सबसे बड़े मीडिया हाउस The Guardian और The Washington Post में एक खबर निकल के आई की इजराइल की कंपनी NSO group द्वारा बनाये Pegasus Spyware से भारत के लगभग 300 लोगो की जासूसी की गयी हैं .

इस खबर के आने के बाद से भारत में इस पर बवाल मचा हुआ है .एक तरफ जहाँ विपक्षी पार्टिया लगातार सरकार पर हमलावर हो रही है दूसरी तरफ सरकार का कहना है की उसने किसी ऐसे Spyware software को इजराइल की कंपनी ख़रीदा ही नहीं.

क्या है ये Pegasus Spyware Software

यह इजराइल की कंपनी NSO group द्वारा बनाया गया एक बहुत ही आधुनिक Spyware Software हैं जो की ios और एंड्राइड दोनों प्लेटफार्म पर काम करता हैं यह बिना आपकी जानकारी के आपके फ़ोन से आपके फ़ोन की सारी डिटेल आपके जासूसी करने वाले के पास ट्रांसफर कर देता है .PBNS की रिपोर्ट के मुताबिक, Pegasus एक लिंक भेजता है और यदि आप उस लिंक पर क्लिक करते है, तो आपके फोन पर Spyware को अनुमति देने वाला कोड इंस्टॉल हो जाता है.

लेकिन कहा यह जा रहा है कि इस नए सॉफ्टवेयर Spyware के लिए किसी भी लिंक पर क्लिक करने की भी आवश्यकता नहीं होती है. एक बार Pegasus Spyware इंस्टॉल हो जाने के बाद, हमलावर के पास आपके फोन की पूरी डिटेल होती है.

और ये Pegasus Spyware इतना आधुनिक हैं की ये सिर्फ एक मिस्ड कॉल के जरिये भी आपके फ़ोन में इंस्टाल हो सकता है उसके बाद कॉल लाँग या उस लिंक को भी ऑटोमेटिकली डिलीट कर देता हैं और आपको पता भी नहीं चलेगा की आप के फ़ोन में कोई Spyware इंस्टाल हो चूका है.

क्या क्या कर सकता है यह Pegasus Spyware

कई रिपोर्ट के मुताबिक, Pegasus किसी भी एप्लीकेशन से पासवर्ड कांटेक्ट लिस्ट या कोई भी पर्सनल डाटा चुरा सकता है इसके अलावा आपके कैलेंडर ईवेंट, टेक्स्ट संदेश और लाइव वॉयस कॉल सहित कॉल की डिटेल भी पढ़ सकता हैं और आपके लाइव लोकेशन से लेकर आप कहा कहा गये हो सारी डिटेल चुरा सकता हैं . बिना आपके जानकारी के ये आपके कैमरे को भी ऑन या ऑफ कर सकता है या फोन के आसपास की सभी गतिविधियों को रिकॉर्ड करने के लिए रिकॉर्डिंग भी कर सकता हैं.

क्या है NSO Group

NSO Group एक इजराइल की साइबर सिक्योरिटी कंपनी है जो ‘निगरानी प्रौद्योगिकी’ में स्पेशलिस्ट है. और यह कंपनी दुनिया के सरकारों के साथ मिलकर अपराध और आतंकवाद से लड़ने में मदद करने का दावा करती है. NSO Group 40 देशों में अपने ग्राहकों को 60 खुफिया, और सैन्य रूप में बताता है.

कंपनी ने भी यह माना है की उसने ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित किया है लेकिन यह सॉफ्टवेयर केवल वह किसी देश के सरकार को ही देती है इसके अलावा और कोई भी इसको इस्तेमाल नहीं कर सकता है और वह अपने किसी भी क्लाइंट की पहचान उजागर नहीं करता है. उसने यह भी दावा किया हैं की इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके कई देशो ने कई आतंकी गतिविधियों और आतंकी हमलो को रोका हैं और और कई बड़े अपराध होने से रोके हैं .

क्यूँ मचा हैं भारत में बवाल ?

दरअसल जो रिपोर्ट आई है उसमे लगभग 50000 मोबाइल नंबर की लिस्ट जारी की है जिसमे ये बताया गया है की इन मोबाइल नंबरों पर कभी न कभी इस Spyware की मदद से निगरानी रखी गयी है. इसमे बहुत सारे देशो के साथ साथ भारत के भी लगभग 300 लोगो के डाटा पर भी इस Spyware की मदद से निगरानी रखी गयी है, सबसे दिलचस्प बात ये है इसमे 40 लोग मीडिया के है 3 लोग विपक्षी पार्टी के हैं 2 लोग सत्ताधारी पार्टी के हैं और 1 संबैधानिक पद के व्यक्ति हैं इसके अलावा बहुत सारे बिजनेसमैन और अन्य व्यक्ति सामिल हैं . हालाँकि ये लोग कौन कौन है इसके बारे में कुछ भी नहीं कहा गया हैं.

इसी बात को लेकर सारी पार्टिया सरकार को घेर रही हैं की भारत सरकार ने भी इस सॉफ्टवेयर का उपयोग करके लोगो के निजता के अधिकार का हनन किया है. लेकिन इस बात को लेकर भारतीय सरकार का कहना है की उसने कभी भी किसी ऐसे सॉफ्टवेयर का उपयोग नहीं किया हैं. और रिपोर्ट में कही भी ये नही बताया गया हैं की इसे भारतीय सरकार ने निगरानी रखने के लिए उपयोग किया है.

इस रिपोर्ट को The Guardian, The Washington Post ने इसे प्रोजेक्ट Pegasus का नाम दिया हैं. हालाँकि इस रिपोर्ट पे संदेह भी किया जा रहा है और संदेह करने का सबसे बड़ा कारण है की जिस संस्था द्वारा इसे इन मीडिया को प्रोवाइड कराया गया हैं . इस डाटा को एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा एक्सेस किया हैं जिसको की भारत में कुछ दिन पहले ही बैन किया गया हैं. और इस संस्था का मालिक हैं जार्ज सोरोस . और ये कौन है और भारत की नेशनलिस्ट सरकार से कितनी नफरत करता है ये पूरी दुनिया जानती है इसके बारे आप हमारे पिछले पोस्ट को भी पढ़ सकते हैं.

जॉर्ज सोरोस (George Soros) कौन है? 90 वर्ष की उम्र में भी भारत की बर्बादी क्यों चाहता है?

और दूसरी इसके टाइमिंग को लेकर संदेह किया जा रहा हैं क्योकि मानसून सत्र के सुरु होने के पहले ऐसी रिपोर्ट का आना और उसके बाद सदन में हंगामा होना तय करता हैं . और हुआ भी ऐसा जिसकी वजह से सालो से चली आ रही संसद की परम्परा टूट गयी जिसमे नए मंत्रियो का परिचय कराया जाता है . और इस मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण बिल भी पारित होने वाले हैं. जिसके लिए संसद का ढंग से चलना जरुरी है जो की इस प्रोजेक्ट Pegasus की वजह सुचारू रूप से नहीं चल सकती हैं.

Varun Sharma

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